1. वही रंजिश, वही हसरतें, न ही दर्दे दिल में कमी हुई,
अजीब सी है मेरी ज़िन्दगी, न गुजर सकी न ख़त्म हुई।
2. यूँ तो भूलें हैं हमें लोग कई पहले भी बहुत से,
पर तुम जितना उनमे से कभी कोई याद नहीं आया ।
अजीब सी है मेरी ज़िन्दगी, न गुजर सकी न ख़त्म हुई।
2. यूँ तो भूलें हैं हमें लोग कई पहले भी बहुत से,
पर तुम जितना उनमे से कभी कोई याद नहीं आया ।
3. सुबह होती है शाम होती है,
ज़िन्दगी यूँ ही तमाम होती है.
साक़ी जब नही है बज़्म में,
मैकशी भी हराम होती है.
दिन गुज़रता है ग़म-ए-दुनिया की फ़िक्र में,
रात तेरी यादों के नाम होती है।
ज़िन्दगी यूँ ही तमाम होती है.
साक़ी जब नही है बज़्म में,
मैकशी भी हराम होती है.
दिन गुज़रता है ग़म-ए-दुनिया की फ़िक्र में,
रात तेरी यादों के नाम होती है।
*Saqi- One who serves liquor
Bazm- Social Gathering/ Mehfil
Maikashi- Drinking Liquor
4. भीगी हुई एक शाम की दहलीज़ पे बैठे,
हम दिल के सुलगने का सबब सोच रहे हैं.- शाकेब जलाली
हम दिल के सुलगने का सबब सोच रहे हैं.- शाकेब जलाली
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